सावन का महीना मतलब शिव की भक्ति का समय.. कांवड़िये सावन में अपनी मनोकामनाओं को पूरा करवाने के लिये शिव को मनाने के लिये घोर तपस्या करते हैं. गंगा से जल लेकर नंगे पांव शिव मंदिर तक जल चढ़ाने में आने वाली पीड़ाएं उनके लिये कोई मायने नहीं रखती… और फिर आता है सावन के शिवरात्री का त्यौहार.. शिव के भक्तों को इस दिन का इंतजार होता है जब शिव उनकी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं शिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को प्रसन्न करने का दिन माना जाता है। हिन्दू शास्त्रों में ये दिन सबसे अहम है सिर्फ त्यौहार ही नहीं मनोकामनाओं को पूर्ण करने का जरिया है शिवरात्री.
साल में दो बार शिवरात्रि मनाई जाती है एक फाल्गुन के महीने में कृष्ण चतुर्दशी को और दूसरा सावन के महीने में. फाल्गुन की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है क्योंकि मान्यता है कि सृष्टि की शुरूआत में इसी दिन आधी रात को भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय के वक्त इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से खत्म कर देते हैं यही वजह है कि इसे महाशिवरात्रि या कालरात्रि कहा गया है वैसे ही सावन की शिवरात्रि का भी महत्व कम नहीं है.

शिवरात्रि एक ऐसा दिन जब देशभर के मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ती है. शिवभक्त जहां होते हैं ऐसी तमाम जगहों पर खास तैयारियों की जाती है वाराणसी से लेकर उज्जैन और हरिद्वार तक हर जगह शिवभक्त भक्ति में डूबे हुए नजर आते हैं खासकर शिव के 12 ज्योतिर्लिगों में लोगों का हुजूम जमा हो जाता है हर-हर महादेव के नारों से आसमान गूंजता है धरती पर शिव की भक्ति में डूबे लोग नजर आते हैं. कहते हैं शिवरात्रि में चमत्कारी शिव की असीमित शक्तियां समाई होती हैं इस दिन व्रत और पूजन करने से हर मनोकामना पूरी होती है
देशभर में कई जगह शिव भक्त इस दिन का इंतजार करते हैं
- झारखंड के देवघर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतार लग जाती है , शुभ योगों वाली शिवरात्री में किसी भी पहर पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है .
- उज्जैन में सुबह तीन बजे ही महाकाल के कपाट खुल जाते हैं, भव्य श्रृंगार के बाद महाभस्माआरती की जाती है हजारों की तादात में श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं
- चूरू में शिवरात्री के मौके पर कई फुट उंची शिव मूर्ति बनाई जाती है सुबह पांच बजे से ही दूध, जल और प्रसाद के लिए भक्तों की भीड़ यहां जुट जाती है
- बनारस में अखंड रूद्राभिषेक यज्ञ कराने की भी परंपरा रही है
- कई जगह रात भर जागकर शिव की अराधना की जाती है
भक्ति से मिलती शिव की शक्ति
शिवभक्त बड़े धूमधाम से शिव की पूजा करते हुए मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर बेल-पत्र चढ़ाकर पूजन करते हैं. पूरी श्रद्धा के साथ उपवास किया जाता है फल फूल दूध चढ़ाकर अराधना होती है और साथ ही रात को जागरण करते हैं. शिवलिंग पर बेल-पत्र चढ़ाना, उपवास और रात्रि जागरण करना एक विशेष कर्म की ओर इशारा करता है. ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, स्त्री-पुरुष, बालक, युवा और वृद्ध सभी इस व्रत को कर सकते हैं.
व्रत का विधान
सुबह नहा कर शिव का नाम लेकर व्रत की शुरूआत होती है शिवरात्रि पर असली व्रत वही माना जाता है जब परमात्मा का ध्यान कर उससे सीधा सपंर्क किया जा सके. उपवास का असली मतलब है पास रहना यानि शिव का ध्यान कर उनके करीब रहना वहीं जागरण का सच्चा अर्थ है काम, क्रोध जैसे पांच विकारों से मुक्त होकर अज्ञानता भरी कुम्भकरण नींद से खुद को बचाना.
सावन का कोई भी दिन किसी भी प्रहर अगर भोले बाबा की आराधना की जाए, तो मां पार्वती और भोले त्रिपुरारी दिल खोलकर कर कामना पूरी करते हैं. पूरे मन से की गई शिवशक्ति की आराधना और हर कामना को पूरा कर सकती है. बम बम भोले….


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