विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण, भक्तों के प्रिय भगवान माने जाते हैं. कृष्ण को भक्ति से ज्यादा भक्तों का प्रेम प्यारा होता है. इसी प्रेम की खातिर भक्त हर उस जगह को पवित्र मान कर पूजते हैं जहां से श्रीकृष्ण का कोई नाता हो. उत्तर प्रदेश के वृंदावन का कोना कोना भागवान कृष्ण की लीलाओं से भरा हैं. वृंदावन में कृष्ण का बचपन गुजरा. यहां का केसी घाट भी भक्तों के लिये खास अहमियत रखता है.
दुष्ट राक्षस का किया था वध
मान्यता है कि केसी घाट पर ही भगवान कृष्ण ने दुष्ट राक्षस केसी से युद्ध किया था और अपने मित्रों और समुदाय को उनकी दुष्टता से बचाया था. यमुना के किनारे चीरघाट से पूर्व दिशा में केसी घाट है.
केसी घाट की कथा
एक समय सखाओं के साथ कृष्ण यहां गोचारण कर रहे थे. इसी दौरान सखा मधुमंगल ने हंसते हुए श्रीकृष्ण से कहा-प्यारे सखा! अगर तुम अपना मोरमुकुट, मधुर मुरलिया और पीतवस्त्र मुझे दे दो तो सभी मुझे ही प्यार करेंगे और साथ ही गोपियां रसीले लड्डू मुझे ही खिलाएंगी. हंसते हंसते ये भी कहा कि फिर तुम्हें कोई पूछेगा भी नहीं. कृष्ण ने हंसकर अपना मोरपंख, पीताम्बर, बांसुरी और लकुटी मधुमंगल को दे दी जो इठलाता हुआ इधर-उधर घूमने लगा. इसी बीच वहां महापराक्रमी केसी दैत्य विशाल घोड़े का रूप धारण कर कृष्ण का वध करने के लिए वहां पहुंच गया. राक्षस कंस से कृष्ण से सुन कर आया था कि जिसके सिर पर मोरपंख, हाथों में मुरली,अंगों पर पीतवसन देखो, उसे कृष्ण समझकर मार डालना. राक्षस ने कृष्ण को छोड़ उनकी चीजों से सजे हुए मधुमंगल को देखकर अपने दोनों पिछले पैरों से उस पर आक्रमण कर दिया. कृष्ण ने जब देखा तो झपटकर पहले ही मधुमंगल को बचा लिया. इसके बाद केसी दैत्य का वध कृष्ण के हाथों हुआ. राक्षस के वध के बाद डरा सहमा और लज्जित हुआ मधुमंगल कृष्ण के पास गया और उनकी मुरली ,मयूरमुकुट, पीताम्बर लौटाते हुए बोला- मुझे लड्डू नहीं चाहिए. प्राण बचे तो लाखों पाये. उसकी ये बात सुनकर ग्वाल-बाल हंसने लगे. बस तभी से केसी घाट कृष्ण लीला के कारण प्रचलित हो गया. आज भी केसीघाट इस लीला को अपने हृदय में संजोये हुए विराजमान है और लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है.
प्राकृतिक सौंदर्य से भरा है केसी घाट
श्रीकृष्ण के राक्षस संहार की घटना को अपने हृदय में समाए हुए विराजमान है केसी घाट. ये हिंदू धर्म में काफी पवित्र जगह मानी जाती है. यमुना घाट के साथ यहां ढेरों छोट-छोटे मंदिर भी हैं. यहां का प्राकृतिक सौंदर्य देखकर लोग मुग्ध हो जाते हैं. ये भी मान्यता है कि इस घाट पर यमुना में डुबकी लगाने से मुक्ति मिलती है. श्रद्धालु खासतौर से यहां शाम में होने वाली आरती देखने के लिए भी जमा होते हैं.
कब आये केसी घाट?
यू तो पूरा साल केसी घाट पर श्रद्धालु पहुंचते हैं लेकिन मौसम के हिसाब से अक्टूबर से मार्च के बीच यहां आना सबसे अच्छा माना जाता है. दिल्ली से महज 160किलोमीटर दूर मथुरा के वृंदावन में केसी घाट है. यहां के आस पास शाहजी मंदिर,इस्कॉन टेंपल, सेवा कुंज और निभुवन आकर्षण का केंद्र रहे हैं इसके अलावा मथुरा वृंदावन आने वाले मदन मोहन मंदिर, बांके बिहारी मंदिर का दर्शन भी जरूर करते हैं.



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