इस डोर में है संसार
टूटे न कभी ये प्यारा सा बंधन,
है खास बहुत ये रक्षा का बंधन
रेशम सा मुलायम ये प्रेम का बंधन
विश्वास और भरोसे का ये बंधन
बारिश की फुहारों में चंदन सा महकता बंधन
भाई और बहन का ये रिश्ता चमकता है जब एक छोटी सी डोरी इसे और गहरा कर देती है एक डोर जो बांधती है दो इंसानों को, रक्षा की कसम खाता है भाई और जीवन भर भाई की लंबी उम्र की कामना करती है बहन, साल भर इस दिन का इंतजार रहता है भाई बहन को, क्योंकि ये दिन सिर्फ उनके प्यार का त्यौहार मनाने का होता है भाई की दाहिनी कलाई पर प्यार का धागा बांधकर बहन जब उसके माथे पर तिलक करती है तो उसका मतलब भाई से अपनी रक्षा का संकल्प लेना होता है, वैसे तो भाई बहन का प्यार किसी दिन का मोहताज नहीं पर हमारे देश में जहां हर रिश्ते को बड़े प्यार से सहेज कर रखा जाता है इसके लिये खास दिन रखा गया है इस खूबसूरत दिन को हिंदु कैलेंडर के श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है
पौराणों में रक्षाबंधन का जिक्र काफी पुराना है इसका इतिहास हिंदू पुराण कथाओं में है। वामनावतार नाम की पौराणिक कथा में रक्षाबंधन का प्रसंग मिलता है जब राजा बलि ने यज्ञ कर स्वर्ग पर अपने अधिकार करने की कोशिश की, तो देवराज इंद्र ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। विष्णु जी वामन ब्राह्मण बनकर राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंच गए।

गुरु के मना करने पर भी बलि ने तीन पग भूमि दान कर दी। वामन भगवान ने तीन पग में आकाश-पाताल और धरती नाप कर राजा बलि को रसातल में भेज दिया। उसने अपनी भक्ति के बल पर विष्णु जी से हर समय अपने सामने रहने का वचन ले लिया। लक्ष्मी जी इससे चिंतित हो गई।
नारद जी की सलाह पर लक्ष्मी जी बलि के पास गई और रक्षासूत्र बांधकर उसे अपना भाई बना लिया। बदले में वे विष्णु जी को अपने साथ ले आई। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी।
इसी तरह महाभारत में भी रक्षाबंधन के पर्व का उल्लेख है। जब युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं सभी संकटों को कैसे पार कर सकता हूं, तब कृष्ण ने उनकी और उनकी सेना की रक्षा के लिए राखी का त्योहार मनाने की सलाह दी थी।
दौपदी और कृष्ण का संबंध भी इसी सूत्र से बंधा था, सुदर्शन चक्र के कारण कृष्ण की उंगली में चोट लगने से रक्त प्रवाह हुआ था उसे रोकने के लिए दौपदी ने अपने आंचल से उसे रोका था, कृष्ण ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए चीर हरण के समय दौपदी की रक्षा की थी
रक्षाबंधन के त्यौहार से जुड़ी कई और कहानियां है, रानी कर्मवती की कहानी को तो भुलाया नहीं जा सकता है उसने अपने देश और अपनी अस्मत की रक्षा के लिये बादशाह हुमायु को राखी भेज कर हिंदु मुस्लिम एकता को बढ़ाया था और हुमायुं ने भी इस सूत्र और रक्षाबंधन के त्यौहार का मान रख चितौड़ की रक्षा की थी हुमायूं ने मुसलमान होते हुए भी राखी की लाज रखी।
कहते हैं, सिकंदर की पत्नी ने अपने पति के हिंदू शत्रु पुरु को राखी बांधकर उसे अपना भाई बनाया था और युद्ध के समय सिकंदर को न मारने का वचन लिया था। पुरु ने युद्ध के दौरान हाथ में बंधी राखी का और अपनी बहन को दिए हुए वचन का सम्मान करते हुए सिकंदर को जीवनदान दिया था।
रक्षा बंधन का ये त्यौहार वैसे तो भाई बहन के प्यार का प्रतीक माना जाता है लेकिन इस त्यौहार का प्रमुख अर्थ रक्षा से लिया जाता है जिसे सूत्र या धागे के रूप में बांधा जाता है, प्राचीन कथाओं में राजा इंद्र की पत्नी (सुचि) इंद्राणी ने इंद्र की कलाई में रक्षा सूत्र बांध कर युद्ध में विजय के लिये प्रार्थना की थी, दोनों पति पत्नी थे लेकिन बंधन रक्षा का था
रक्षा बंधन का एक और महत्व भी है ब्राहमण संप्रदाय में इस दिन ऋषि तर्पण किया जाता है, इस दिन तालाब या पोखर या बहती नदी पर जाकर मंत्रोउ्च्चारण के साथ जनेउ धारण किया जाता है पुराने जनेउ धागे को उतार कर नया धारण किया जाता है, उसके बाद घर आकर मुर्हुत के साथ राखी बंधवाई जाती है
आज के मॉर्डन युग की बात करें तो रक्षा बंधन मनाने का तरीका भी मॉर्डन हो रहा है धागे की जगह बैंड ले रहे हैं तो त्यौहार फेसबुक और व्हाट्स एप्प पर मनाये जा रहे हैं, वीडियो कांफ्रेसिंग के जरीये विदेशों में बैठा भाई बहन से जुड़ जाता है और संगन सीधी एकांउट में ट्रांसफर हो जाता है, रूप भले ही मॉर्डन हो लेकिन एहसास वही पुराने हैं, कोई पूरे रिती रिवाज के साथ त्यौहार मनाता है तो कोई त्यौहार को अपने रंग में रंग लेता है लेकिन राखी का ये बंधन अपनी चमक को बरकरार रखे हुए है

वैसे धर्म और कर्म दो ऐसी बातें है जो साथ चले तो देश का विकास हो सकता है धर्म में कही बातें इंसान के कर्मों को ठीक करने में मदद करती है आज जरुरत न सिर्फ एक भाई के अपनी बहन की रक्षा करने की है बल्कि हर उस लड़की की रक्षा की कसम खाने की है जो मुसीबत में है, कहीं अस्मत लुटाती अबला है तो कहीं कोख में मरती मासूम, इनकी रक्षा की कसम भी खाने की जरुरत है आज हर भाई को, ये त्यौहार एक परिवार की खुशियों का नहीं, देश की हर बेटी और बेटे के उनकी जिम्मेदारी समझने का भी है
तोहफे में अपनी बहन को दुनियाभर की खुशियां देने का इरादा करने वाला हर भाई अगर ये इरादा भी कर लें कि वो राह चलती हर लड़की की इज्जत करेगा तो शायद इस देश से दरिंदगी का कंलक मिट जाये, हर बहन को इस दिन ही नहीं हर दिन सुरक्षित होने का एहसास रहे, ये सकंल्प हर भाई को लेना होगा, अपनी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर सिर्फ अपनी बहन की ही नहीं हर बहन की रक्षा की कसम खानी होगी,
अगर सोचा जाये तो कई भाई ऐसे है जिनकी कलाईयां इस दिन सूनी रह जाती है और उसका कारण लिंग अनुपात कम होना है, लड़कियों को कोख में मारने वाले ये भूल जाते हैं कि लड़कियां ही संसार को आगे बढ़ाती है, लड़का लड़की में भेदभाव करने वाले ये जान लें रक्षा का ये त्यौहार तभी मनाया जा सकता है जब भाई की कलाई में बहन का प्यार बंधे
इस डोर में है संसार,
कच्चे धागे ये बंधन
होता है बड़ा मजबूत
बढ़े ये मजबूती
ये दुआ है हमारी
रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं!


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वाह
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