मैं बीते कई सालों से देख रहा हूं कि हमारी परंपरा के अनुसार मनाए जाने वाले हर त्योहार को लेकर संदेह की स्थिति पैदा हो जाती है। कोई कहता है कि वो फलां तारीख को मनाया जाएगा और कोई कहता है कि वो उसके आगे या एक दिन पहले मनाया जाएगा। अब इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को ही ले लिजिए। कोई कृष्ण जनमाष्टमी को 11 अगस्त को मना रहा है जबकि कई लोग इसे 12 को मनाने की तैयारी कर रहे हैं।
सवाल ये है कि भगवान का जन्म तो एक ही तारीख और एक तिथि पर हुआ था फिर आखिर ये कन्फयूजन कौन पैदा कर रहा है। अब तक आखिर कोई ऐसी कोशिश क्यों नहीं की गई कि बाकी धर्मों की तरह हम भी एक ही तारीख पर अपने सभी त्योहारों को मनाएं। न तो कभी सिखों में गुरुपर्व की तारीख को लेकर विवाद होता है , न किश्चनों के प्रभु यीशु के जन्मदिन को लेकर विवाद होता है और न ही ईस्लाम में ईद या बकरीद की तारीख को लेकर विवाद होता है। फिर आखिर हमारे ही धर्म में ऐसा क्यों हो रहा है।
आईए आपको बताते हैं कि आखिर ये कन्फयूजन होता कहां से है। ये जानने के लिए हमने बात की मशहूर ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी से। पंडित जी बताते हैं कि दरअसल हिंदू धर्म में वैष्णव, शैव और शाक्त लोगों के लिए त्योहारों को बीते लंबे समय से अलग अलग समय में ही मनाया जा रहा है। ये आज तक कभी एक नहीं हो पाए हैं। यही व्यवस्था हम नवरात्रों में भी देखते हैं। कोई अष्टमी का पूजन करता तो कोई नवमी का पूजन करता है।
लेकिन सवाल ये खड़ा होता है कि पहले कभी इस प्रकार की दुविधा क्यों नहीं होती थी। पहले तो हर त्योहार एक ही मनाया जाता था तो अब आखिर ऐसा क्या हो गया है कि हमारे सामने हर त्योहार की दो तारीखे सामने आ जाती है। इसे लेकर वो बताते है कि हम अपनी तारीखों को जो अंग्रेजी कलेंडर के साथ मिसमैच कर रहे हैं ये सब उसी का नतीजा है। लेकिन सवाल ये भी पैदा होता है कि क्या हमारे देश में मौजूदा कई तरह के अलग अलग पंचागों में तिथियों का फर्क होता है। इसके जवाब में वो न कहते हैं। हां वो ये जरूर कहते हैं कि घटी और पल में अंतर हो सकता है। लेकिन तिथि हमेशा एक ही रहती है।
दरअसल भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि को और रोहिणी नक्षत्र में आधी रात को हुआ था। जिस दिन ये तीनों स्थितियां बनती है उसी दिन कृष्ण का जन्म होता है और उत्सव मनाया जाता है। इस बार 11 तारीख को दोपहर 12 बजे से अष्टमी लग रही है। जो अगले दिन 12 बजे तक चलेगी। लेकिन रोहिणी नक्षत्र की स्थिति 12 तारीख में बैठ रही है। इसलिए मथुरा से लेकर सभी जगह इसे 12 अगस्त को मनाया जा रहा है। इसी दिन रात में 12 बजे भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाने जा रहे हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार 12 तारीख ही कृष्ण जन्म की सही तारीख लगती है।
क्या हम हिंदुओं में भी कोई ऐसी व्यवस्था नहीं हो सकती कि हम सभी त्योहारों को एक ही दिन मनाए।
—- मसलन कष्ण जन्माष्टमी की तारीखें मथुरा से तय हो और राम नवमी की तारीख श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र तय करे। इसी तरह से होली क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा त्योहार है तो उसकी तारीख मथुरा से तय हो और दीवाली की तारीख श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट की ओर से घोषित की जाए।
अगर ऐसा होता है कि तो निश्चित तौर पर सभी हिंदुओं के लिए जहां एक ओर दुविधा खत्म होगी वहीं समूचे देश में जब एक ही दिन त्योहार मनेगा तो उसका बड़ा व्यापक असर हमारी सांस्कृतिक एकता पर भी पड़ेगा।
मेरा ये सुझाव कैसा इस पर आप अपनी राय जरूर दीजिए।


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